शब्दों के किनारों पर
--डॉ अभि सुवेदी
रात को
कितने आंसू वह गए
मालूम नहीं पड़ा
सुबह नदी की सायँ-सायँ सुनने पर
बहता हुआ दिल ढूंढ निकालने के लिए
मैं शब्दों के किनारों पर दौड़ चला ।
मूल नेपाली से अनुवादः कुमुद अधिकार