क्रोध
--मुकुल दाहाल
क्रोध में
शेर बन गये मुर्गे
घड़ियाल बन गए केचुए
सदा जीभ के नीचे दबनेवाले स्वर
गर्जन बन गए
क्रोध ने विवेक का
रथ भेदन किया
दृष्टिभ्रम किया
हाथ में पैना
हथियार थमा दिया
और दिया आदेश
प्रहार का ।
मूल नेपाली से अनुवादः कुमुद अधिकारी