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सूत्र कथाएँ

डॉ ध्रुवचन्द्र गौतम

रात बादल और प्रेमिका

1. चुम्बनः बादल से घिरी हुई रात थी।प्रेमी और प्रेमिका आकाश के नीचे एकान्त का मजा ले रहे थे। बादलों से घिरे हुए आकाश का  फायदा लेते हुए प्रेमी ने प्रेमिका को गहरा चुम्बन जड़ दिया।लजाते हुए प्रेमिका ने कहा- "तुम्हें मुझे कुछ देना है।"

"क्या?" उसने कहा।
"पाँच हजार रूपए।"

"ज्यादा नहीं हुए?"

"प्यार में मोल भाव नहीं होता।"

उसने प्रेमिका को पाँच हजार थमाते हुए कहा - "मेरे पास दो हजार और हैं।"

"तब तो इन्तजार करो।"

"बादल घिरे रात का?"

"नहीं, उस दिन का जब तुम्हारे पास बाकी तीन हजार जमा हो जाएं।" प्रेमिका ने कहा और बैग लटकाते हुए चल दी।

 

2. वह तारिणी का 'सर्प दंश' पढ़कर बहुत प्रभावित हुआ। इस तरह वह सांपों के बिल में हाथ डालता गया। अनेक बार हाथ डालने पर भी सांप ने उसे नहीं काटा। इसने उसे साहसी तो बनाया पर सांप के न काटने से दुःखी होकर उसने सांपों के बिल में हाथ डालना ही छोड़ दिया। वह कहा करता था- "असल में आजकल सांप ही मेरे हाथ देखकर डर जाते हैँ, न जाने क्या हो जाए काटने पर? इसलिए मुझे काटकर अपना जहर बरबाद करने के बदले वे अपना जहर महफूज रखना चाहते हैँ। उन्हें अपने जहर के मूल्य का बोध हो गया है।"

 

3. डॉक्टर ने उसे देखकर प्रेस्क्रिप्शन थमा दिया। फिर कहा - "ये तो दवाइयां हैं, तुम्हें अच्छी खुराक की भी आवश्यकता है।"

      उसने फिर पूछा- "फिर अच्छी खुराक को क्या आवश्यक है डॉक्टर साहब?"

डॉक्टर को यह सवाल बिलकुल बेतुका लगा और वह दूसरे रोगियों को देखने लगा।

      वह हाथ में प्रेस्क्रिप्शन लेकर इन्तजार करता रहा, दूसरे रोगियों को खुराक के विषय में डॉक्टर क्या कहता है।

      उसके विचार में यदि डॉक्टर ने कुछ नहीं कहा तो, वह दूसरे रोगी को बहला फुसला कर वह प्रेस्क्रिप्शन बदल लेगा।

4. फर्कः

- सांप और आदमी में क्या फर्क है?

- सांप मंत्री नहीं बन सकता।

- फिर सांप और मंत्री में क्या फर्क है?

- मंत्री सांप बन सकता है।

 

5. उसने जाकर नेता से कहा- "अच्छा आदमी बनना चाहता हूं।"

      नेता ने पूछा- "पहले तो तुम नेता बनना चाहते थे।"

      उसने फिर कहा- "मैं अच्छा नेता भी बनना चाहता हूं।"

      उसे अच्छा नेता बनाया गया। कुछ दिनों बाद उसने आकर फिर कहा- "कम से कम एक और अच्छा नेता तो मुझे दीजिए, संगत के लिए। ऐसे तो मैं अकेला पड़ गया हूं।"

      बड़े नेता ने पीठ थपथपाते हुए कहा- "हां, इसलिए कोई अच्छा नेता नहीं बनना चाहता। तुम्हारे लिए कौन अपने अधिकारों को त्याग दे? तुम ही कुछ त्याग कर सकते हो तो करो।"

      उसके सामने कोई विकल्प नहीं था। नेता तो वह बन चुका था। फिर वह अकेला नहीं पड़ना चाहता था। उसने याद किया कहीं उसने पढ़ा था 'आदमी एक सामाजिक प्राणी है।'

      उसने खुद से कहा- 'जो अकेला है वह तो असामाजिक हो गया, और फिर जो असामाजिक पड़ जाता है, वह तो आदमी ही नहीं रहता। फिर अगर आदमी ही नहीं बन पड़ा तो अच्छा बनने का क्या मतलब?'

 

6. मंत्रियों के लिए एक महीने का समय था। उसका दोस्त भी मंत्री था जो खाता ही जा रहा था। पन्ध्रहवें दिन खाते हुए मंत्री का हाथ उसने झट पकड़ा और कहने लगा- "बहुत हो गया, अब तो मत खाओ।"

मंत्री ने कहा- "देखकर ही जी भर गया क्या?"

उसने कहा- "मैं भी तो मंत्री बन रहा हूं, दो हप्ते तो मेरे लिए रख दो, कम से कम।"

मंत्री ने कहा- "तुम दूसरा विभाग क्यों नहीं देखते?"

उसने कहा- "जरूर देखता पर वहां के मंत्री तो एडवान्स में ही तीन हप्ते गटक गए।"

मंत्री पछताते हुए कहने लगा- "मैं ही मूर्ख निकला, नहीं जाना पहले।"

वह मन ही मन खुस होने लगा- पछताते हुए ही सही दोस्ती की कदर तो करेगा यह।

 

7.उसकी बहन की शादी की बात चल रही थी। बहन का हाथ मांगने जो भी आता वह उसे गुंडा ही लगता। अंत में बहन ने ऐसे आदमी से शादी की जो गुंडा नहीं दिखता था। वह गुंडा तो था नहीं पर निकला लड़कियों का दलाल।

      अब उसकी बहन खुद के बेचे जाने की कहानी चिठ्ठी लिखकर उसे बताती रहती है।

 

8. अब क्या?

      देश को लुटा जा रहा है।आदमी पिटा जा रहा है। लोग भुने जा रहे हैं। गीता के अनुसार फल न देनेवाले कर्म में जुटे हैं।  सुबह शाम भ्रष्टाचार खाकर हाथ धो ही रहे हैं। नियम-कानूनों पर बीयर पी कर मूत ही रहे हैं। रात को किसी न किसी को रंडी बनाकर सो ही रहे हैं तो क्या चाहिए देश को? ऐसी बातें सुनकर वह वक्ताको भौंचक्का देखने लगा।

 

9. सुन्दरता

      अपनी सुन्दरता से उसने बहुतों को रिझाया।बहुतों से ईर्ष्या की। बहुत धनवान व चर्चित भी हुई। बहुतों की दिल की धड़कन बनी। बहुत खेली राजनीति से।अपने वदन से भी बहुत खेली। मतवाली बनी। ढेर सारी ड्रग्स गटक गई और अपने वदन का प्रदर्शन किया।

      एक दिन अचानक वह एकांत में मर गई। किसी को पता भी नहीं चला। उसका जैसा सुन्दर वदन क्या बन के कहां पहुंचा, इस बारे में इतिहास भी चुप ही रहा।

      अचानक वह डर गया कि कहीं अपनी प्रेमिका को दूसरी बार चुमते ही वह खत्म तो नहीं हो जाएगा? या फिर प्रेमिका ही?

      सोचते ही वह घर की तरफ बेतहासा दौड़ चला।

 

10. रात बादल और प्रेमिका

      फिर बादलोंवाली रात आ गई थी। उसे प्रेमिका के साथ ही वह तीन हजार रूपये भी याद आए जो उसे जमा करने थे। मां को उसने कोई प्रेस्क्रिप्शन तैयार करके दिखा दिया जिसमें डॉक्टर ने तीन हजार रूपये की दवाएं लिख दी थी। मां ने उसे प्यार से पांच हजार रूपये थमा दिए।

      उसने फिर प्रेमिका को चूमा और कहा- "मेरे पास दो हजार और हैँ।"

      "तो फिर तुम इंतजार करो।"

      "तीन हजार और जुगाड़ करने का?"

      "नहीं " प्रेमिका ने कहा- "ऐसी ही बादलोंवाली रात का।"

      "फिर तीन हजार?"

      "तुम्हारा प्रेस्क्रिप्शन लूंगी, पैसे के बदले।"

      "क्यों?"

      प्रेमिका ने कहा- "क्योंकि प्रेस्क्रिप्शन दिखाने से मां पांच हजार देंगी। तुम्हारे दो हजार तो बचे रहेंगे। कल को गृहस्थी भी तो देखनी है। उस वक्त काम आएंगे।"

      प्रेमिका की दूरदर्शिता से प्रभावित हो वह उसे फिर चूमने लगा। इस बार प्रेमिका कुछ नहीं बोली बल्कि पूछने लगी- "प्यार में मोल भाव अच्छा नहीं होता न?"

मूल नेलाली से अनुवादः कुमुद अधिकारी


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